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Wednesday, 14 August 2013

जो कहता हूँ वो बात पुरानी लगती है

यू तो हर रोज़ कहानी मिलती है.
जो कहता हूँ वो बात पुरानी लगती है



हर आदमी बुलबुला सा दिखता है
लहरो पे समुंदर नाम मोहब्बत लिखता है
किताबो मे दबे गुलाब सुर्ख हो गये..
रोटी हुई आँखो पे अब झूर्र सो गये..
यू तो हर रोज़ कहानी मिलती है.
जो कहता हूँ वो बात पुरानी लगती है

वो झड़के गिरा पत्ता खुद पेड़ बन गया.
बचपन की मौज अब खेल बन गया.
धीमी सी तफ़्टार यू तेज़ हो गयी
गीली मेहन्दी के हाथ रंग्रेज़ हो गयी.
बुलंद वो आवाज़ आज भी बुलंद है.
उन आँखो मे आज भी वही घमंड है..
सीना तान के बच्चे पन्ने पलटते है..
वो क़िस्से आज भी अलाव पे जलते है..
शान से साँसे खिलती है..
यू तो हर रोज़ कहानी मिलती है.
जो कहता हूँ वो बात पुरानी लगती है

खिज़र


Friday, 26 July 2013

कौन हूँ मे?

कौन हूँ मे?
कुछ ख़याल नही..
कुछ सवाल नही..
चुप हूँ मे..कुछ आवाज़ नही
जैसे बहता पानी शांत
पत्थर से ठोकर खाने के बाद..
उलझी कहानी और गुच्छे जैसे ख़याल
साँसे भी रवा जैसे डूबा कोई बुलबुला..
शुरुवत की झिझक और शुरूवात का ना अंत हुआ..
अंजान हूँ मे अपनी लगान से..
गुम हूँ में अजीब से सफ़र मे..
सपने भी देखे रोज़ आँखे बदलके.
पर में बेहोश हू बेज़ार हलातो मे..
मेरा ना कोई वजूद.. 
बड़ा रहा हू कोख मे मोजूद..
नये बीज डाले है खेत मे..
कोई सेलाब शायद समेटा बैठा हूँ..
हाथो मे लकीरो के बदले कल कहता हूँ..
फिर भी ज़िंदगी क़ानून मे..
कौन हूँ मे?
क्या हूँ मे?



Wednesday, 17 July 2013

पतंग


एक लड़का है पागल सा।
दिमाग उका जंगल सा।
रहते उसमे उलझन और सवाल।
पर उसकी पतंग है उसकी मशाल।
वो चिंगारी का खज़ाना है।
पर उससे अभी तक न किसी ने जाना है।
उसने न मंझा लूटा है।
वो खुद कांच की तरह टूटा है।
उम्मीद उसका आसमान है।
लेकिन वो तनहा है।
आँखों में चमक और हलकी सी मुस्कान है।
उसकी पतंग उसकी शान है।
वो दिखने में पतला थोडा नादान है।
पर उसकी पतंग उसकी शान है।
पर उसकी पतंग उसकी शान है।

ना उसको भूख की फिकर।
न सिमटा उसका जिगर।
बदलो के आगे उसके निशाँ है।
उसकी पतंग उसकी शान है।


वो ज़मीन से जुदा है।
वो  हालातो  से मुढ़ा है।
वो लकीरों को नहीं जानता।
वो किस्मत को नहीं मानता।
वो अंधेरो में रोता है।
वो सपनो में न खोता है।
वो पत्थर नहीं पानी है।
मतलबी मज़ा उसके लिए बेमानी है।
वो जानता है ऊँची उसकी उड़ान है।
उसकी पतंग उसकी शान है।
उसकी पतंग उसकी शान है।
उसकी पतंग उसकी शान है।